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हड्डी वार्ड में डॉक्टर नहीं, एक साल में 600 मरीज पहुंचे, ऑपरेशन 69 के ही किए
उज्जैन । माधवनगर अस्पताल में संचालित हड्डी वार्ड में लगातार हड्डी के ऑपरेशनों की संख्या घट रही है। वर्ष 2012 में 615 और वर्ष 2013 में 782 ऑपरेशन हुए थे। वहीं वर्ष 2014 से 2016 तक कुल 207 हड्डी के ऑपरेशन हुए यानी 1190 ऑपरेशन कम हुए। तीन साल में ऑपरेशन का प्रतिशत कम हुआ है। यह खुलासा रोगी कल्याण समिति द्वारा हाल में निकाली गई जानकारी में हुआ है। इसकी वजह है अधूरी प्लानिंग व बगैर तैयारी के जिला अस्पताल से हड्डी वार्ड को 4 अगस्त 2014 को माधवनगर अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाना। यहां केवल सर्जन डॉ. हरीश राठौर व एनेस्थेटिक डॉ.एसएल गुप्ता ही पदस्थ हैं। इनमें से कोई छुट्टी पर है या कोर्ट पेशी गया है तो मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पाते। वार्ड में यह हाल है कि एक साल में केवल 69 मरीजों के ऑपरेशन ही हो रहे हैं, जबकि 600 से ज्यादा मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। उन्हें निजी अस्पतालों में राशि खर्च कर ऑपरेशन करवाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को सामान्य उपचार तो दिया जा रहा है लेकिन सामग्री उपलब्ध नहीं होने के नाम पर मरीजों के ऑपरेशन नहीं किए जा रहे हैं।
सभी के ऑपरेशन हो रहे हैं
सात में से दो डॉक्टर ही उपलब्ध हैं, वे इमरजेंसी ड्यूटी भी कर रहे हैं। अस्पताल में जितने मरीज आ रहे हैं, उन सभी के ऑपरेशन हो रहे हैं। किसी को कोई समस्या है तो मुझे अवगत कराए। डॉ.विनोद गुप्ता, प्रभारी माधवनगर अस्पताल
जब से हड्डी वार्ड माधवनगर अस्पताल में शिफ्ट हुआ है तब से ऑपरेशनों की संख्या घटी है। वार्ड का संचालन ठीक से नहीं किया जा रहा है। मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट किया जा रहा है। राजेश बोराणा, सदस्य रोगी कल्याण समिति
ऐसे मिल सकती राहत
जिला अस्पताल में ही वार्ड का संचालन किया जाए, यहां पर पर्याप्त सर्जन व एनेस्थेटिक हैं। उपकरण आदि भी उपलब्ध होने में समस्या नहीं।
पीएस जता चुकी नाराजगी
आंकड़े कम होने पर स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव गौरी सिंह ने डॉक्टरों को हिदायत दी थी, साथ ही डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे ऑपरेशन की सूची तलब की थी।